जहा तक मेरा मानना है, यू पी मे भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी मजबूत है की अब मुझ जैसे हज़ारों युवा पोलीस से और भी डरेंगे| मेरा मानना था की पासपोर्ट वेरिफिकेशन मे एक पैसे का घूस नही दूँगा लेकिन अब एक डर बैठ गया है की खि हज़ारों बेगुनाहों की तरह मुझे भी फ़र्ज़ी केस मे फसा ना दिया जाए!
ऐसा नही है की प्रशासन और सरकार को नही पता है की पासपोर्ट वेरिफिकेशन, आर.टी.ओ, विकास भवन, सरकारी हॉस्पिटल और अन्य दफ़रो मे घूस चलता है, वरन घूस दौड़ता है| लेकिन सत्ता का लोभ और कुर्सी का सुख उन्हे कोई भी बड़ा कदम लेने से रोकता है|
मैने ये पोस्ट लिखते ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है, ना जाने कब कौन सी जाँच कमेटी मुझे उठा ले और फिर अनेक ऐसी धाराएँ लगाए जो शायद मेरी उम्र मे कोई सोच भी सके|
लेकिन लोकतंत्र है ये और इसे ज़िंदा रखने के लिए मेरे जैसे हज़ारों को कुर्बानी देनी ही होगी| भ्रष्टाचार के खिलाफ बग़ावती सुर ही हमे इससे मुक्ति दिला सकती है|
जाते जाते बस एक सवाल 'अगर पुलिस जनता की रक्षक है तो आख़िर क्यू उनसे हम इतना डरते हैं?'
फिर मिलेंगे किसी एक विषय पर चर्चा करने|
जय हिंद

