स्वच्छ भारत अभियान को 26 महीने हो चुकें हैं|. अभी हाल ही मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 'प्रधानमत्री शौचालय योजना' का भी शुभारंभ किया और इस घोषणा के बाद ही गाँवों मे शौचालय बनाने की होड़ सी लग गयी | और लूटखोरों को मिल गया एक और मौका और धीरे धीरे फिर से एक और घोटाला ने अपने पैर जमा लिया|
गाँव रिपोर्टर की टीम निकली शौचालय की गुणवत्ता परखने और रिज़ल्ट काफ़ी चौकाने वाला निकाला| हमारा पड़ाव था जिले का चर्चित गाँव मधोपट्टि, यहाँ हमने शौचालय लाभार्थीयों से बात की, उनके अनुसार एक शौचालय के लिए ग्राम प्रधान शौचालय पाट के साथ 1000 ईट, एक बोरी सीमेंट और 10 फीट रेती देते हैं. बाकी मज़दूरी (खर्चा) और गड्ढा उन्हे खुद से करवाना पड़ा साथ ही दरवाज़ा भी|
चौकिये मत ये तो सोचिए कुछ तो काम हुआ! लेकिन जब हमने खुद से देखा तो हाल और भी बदतर थे, ईट बिल्कुल बेकार गुणवत्ता की और बालू नदी के रेती थी|
जब हमने और खोजबीन की तब पता चला प्रत्येक शौचालय के लिए 12500 रुपये आवंटित हैं| लेकिन प्रधान और आला अधिकारी की मिली भगत से खराब गुणवत्ता के सामान से काम करा कर बाकी धन आपस मे बाट लिया जाता है| यही नही अगर कोई उपभोक्ता 12500 रुपये माँगकर स्वयं शौचालय बनाने की माँग करता है तो उसका नाम सूची से हटा देने की धमकी भी दी जाती है|
इस विकट परिस्थिति मे प्रधानमंत्री का 'जहाँ सोच वही शौचालय' का सपना तो साकार हो जाएगा लेकिन जब दोयम दर्ज़े की ईट की नीचे जाने जाएँगी तो उसका ज़िम्मेदार कौन होगा? प्रधानमंत्री जी, प्रधान या लाभार्थी स्वयं? ये एक बड़ा सवाल है?
